ब्रिटेन की जिस सांसद ने Article 370 पर किया भारत का विरोध, उनके ही ग्रुप पर पाकिस्तान से पैसे लेने के लगे आरोप

यह पता चला है कि पाकिस्तन ने अपने कब्जे वाले कश्मीर (POK) की यात्रा के लिए ब्रिटेन (Britain) के एक संसदीय समूह को 30 लाख पाकिस्तानी रुपये (17,917 डालर) दिए हैं. यह समूह मुख्य रूप से 'कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन' को उजागर करता है.

Pleased to meet PM Imran Khan: UK MP Debbie Abrahams

ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप के रजिस्टर से पता चला है कि 'ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप ऑन कश्मीर (APPGK) को 18 फरवरी को पाकिस्तान सरकार से 29.7 लाख से 31.2 लाख पाकिस्तानी रुपये के बीच मिला. यह धन समूह को 18 से 22 फरवरी के बीच पीओके का दौरा करने के लिए दिया गया. इस समूह की अध्यक्ष लेबर सांसद डेबी अब्राहम ( Debbie Abrahams) हैं.

सभी संसदीय समूहों के लिए यह अनिवार्य है कि वे 1,500 पाउंड से अधिक मूल्य के लाभ या धन पाने पर इसकी घोषणा संसदीय रजिस्टर में करें.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से मिलीं डेबी अब्राहम

डेबी अब्राहम को 17 फरवरी को दिल्ली हवाई अड्डे पर सूचित किया गया था कि उनका ई-वीजा वैध नहीं है और उन्हें दुबई भेज दिया गया था. अगले दिन वह पाकिस्तान पहुंचीं और प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) से मिलीं. इस यात्रा का वित्त पोषण पाकिस्तान द्वारा किया गया था.

APPGK का क्या है काम?

एपीपीजीके में विभिन्न दलों के ब्रिटिश सांसद हैं, जिनमें से कुछ पाकिस्तानी मूल के हैं. इनका उद्देश्य 'कश्मीरियों के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन करना, ब्रिटेन के सांसदों से समर्थन प्राप्त करना, कश्मीर में मानवाधिकारों के हनन को उजागर करना और वहां के लोगों को न्याय दिलाना' है.

पहले भी पाकिस्तान से मिले पैसे

यह पहली बार नहीं है जब APPGK को पाकिस्तान से धन प्राप्त हुआ है. लंदन (London) में पाकिस्तान उच्चायोग ने 17 सितंबर 2018 को उसी साल 17-20 सितंबर के बीच इस्लामाबाद और कश्मीर की यात्रा के लिए समूह को लगभग 12,000 पाउंड दिए थे.

कश्मीर पर भारत की आोलचक रही हैं डेबी

डेबी अब्राहम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत दी गई जम्मू एवं कश्मीर (Jammu and Kashmir) की विशेष स्थिति को खत्म करने के भारत सरकार के फैसले की तीखी आलोचक रहीं हैं. उन्होंने पांच अगस्त, 2019 को लंदन में तत्कालीन भारतीय उच्चायुक्त रुचि घनश्याम को पत्र लिखकर कश्मीर के विशेष दर्जे को हटाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी.

उसी दिन उन्होंने ब्रिटेन के विदेश सचिव डॉमिनिक राब को लिखा कि कश्मीर में भारतीय कार्रवाइयों ने अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन किया है और ब्रिटेन से नई दिल्ली के कदमों पर अस्थायी रोक लगाने का अनुरोध किया था

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