एक देहाड़ी मजदुर ने किसी लड़की की बचाई थी इज्जत, 7 साल बाद लड़की ने इस तरह चुकाया एहसान

उसने अपनी साइकिल उठाई और गाँव के लिए चल दिया। कोलार से 5 किलोमीटर निकलने के बाद उसने देखा कि रोड के किनारे खेतों से काफी आवाजें आ रहीं थीं। आवाजें सुनकर शिवदास रुक गया। उसके रुकते ही किसी लड़की की चीज सुनाई दी। शिवदास ने अपने बारे में कुछ नहीं सोचा और वह खेतों की तरफ भाग खड़ा हुआ। पास जाकर जब शिवदास ने देखा तो वह हैरान रह गया। एक मासूम सी लड़की के साथ तीन लड़के जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहे थे। अचानक जब शिवदास वहां पहुँच गया तो लड़कों ने लड़की को छोड़ शिवदास को पीटना शुरू कर दिया। शिवदास भी उनसे लड़ता रहा। लड़कों ने शिवदास को मार -मार कर लहुलुहान कर दिया किन्तु शिवदास हिम्मत नहीं हारा और मजबूर होकर उन लड़कों को वहां से भागना पड़ा। शिवदास काफी जख्मी हो गया था किन्तु उसकी हिम्मत नहीं टूटी। उसने लड़की को साईकिल पर बैठाया और कोलार में उसके घर केईबी कालोनी में छोड़ दिया, लेकिन अब उसके पास हिम्मत नहीं थी। इस लिय वह उस लड़की के घर में ही गिर गया। जब उस लड़की के परिवार वालों ने यह सब देखा तो वह हैरान रह गएँ। उन्होंने रामदास को निकट के अस्पताल में भर्ती कराया। उस लड़की का नाम रश्मी गुप्ता था। उसके पिता सेना में एक अधिकारी थे। उस दिन वह अपने एक दोस्त के साथ घूमने गई थी और उसी समय उन तीन लड़कों ने उसे दबोच लिया। यह सब देख उसका दोस्त दुम दबा कर भाग गया और शिवदास ने उसकी मदद की। रश्मी उस समय होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रही थी। शिवदास तीन दिन तक अस्पताल में भर्ती रहा और रश्मी उसका अच्छी तरह से देखभाल करती रही। शिवदास ठीक हो गया और अपने घर आ गया। इस घटना के सात साल बाद शिवदास रोज की तरह मजदूरी करने शहर गया हुआ था और रश्मी और उसके पिता अविनाश गुप्ता उसके घर पर पहुँच गए। शिवदास की पत्नी ने बताया कि वो तो शाम तक घर आयेंगे। रश्मी और उसके पिता शाम तक उसका इंतजार करते रहे। शाम को जब शिवदास घर आया तो अपने घर के पास पुलिस वालों को देखकर घबरा गया। उसके मन में किसी अनहोनी की शंका आ रही थी लेकिन जब वह घर गया तो उसने देखा कि सेना का एक अधिकारी और एक खूबसूरत लड़की उसके घर में बैठे हुए हैं। रश्मी के पिता के साथ तीन और फ़ौजी दोस्त आये हुए थे। शिवदास कुछ समझ नहीं पा रहा था। इतने में ही रश्मी ने उठाकर शिवदास के पैर छुए और उसे सात साल पुरानी घटना याद दिलाई। शिवदास उस घटना को एक सपना समझ कर भूल गया था किन्तु रश्मी उस घटना को कैसे भूल सकती थी, जिसमें उसे नया जीवन मिला था। रश्मी के पिता ने शिवदास को कोलार में एक घर खरीद कर दिया और एक ऑटो रिक्शा। आज शिवदास मजदूरी नहीं करता है, ऑटो चलाता है। रश्मी ने बंगलौर में एक होटल खोल रखा है और अक्सर शिवदास से मिलने आती रहती है। रश्मी अभी भी कुंवारी है और बंगलौर में शिवदास के दोनों बच्चों को अपने पास रखकर पढ़ा रही है। दोस्तों हमें भी सदैव दूसरों की मदद करने के लिए तात्पर्य रहना चाहिए क्योंकि किसी की मदद करना दुनिया का सबसे बड़ा पुन्य माना जाता है। दोस्तों अगर हमारी जानकारी से कुछ सीख मिली हो और अच्छी लगी हो तो इसे अपने मित्रों के साथ शेयर करें और इसी तरह की और भी देश में घटित घटनाओं के बारे में जानने के लिए इसे लाइक और हमारे चैनल को फॉलो करें।
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